भांग घोटन , रंग लोटन , जोगीरा सर्रर्रर्रर्र से मालपुआ तक ..

इस बार होली , मेरे लिए इस मायने में खास रही कि पिछ्ले कई वर्षों से बच्चों से वादा करते रहने के बाद इस बार , उन्हें होली दीवाली सा कोई त्यौहार अपने घर में मनाने का मौका मिला । और संयोग ये सुखद रहा कि , काफ़ी समय बाद पुन: साइट को सक्रिय करते हुए ये पोस्ट भी हम आपको इसी पर पढवाने जा रहे हैं । अपनी होली की शुरूआत तो बस , ठंडाई के इस ग्लास के साथ होती है ,

 

दे दना दन चले गुब्बारा , लोग लगे रंग से लोटन में ,
सुबह सबेरे का पहिला डुईटी आज का , हम चले हैं , भांग घोटन में ..

 

भोरे भोर तैयार भांग की ठंडाई ...

आ एक ठो संजोग और देखिए कि , फ़िलहाल जौन राग दरबारी हम पढ रहे हैं उसमें ,

 

” घर नज़दीक है ,बाहर पिसी हुई भंग तैयार होगी , पीकर, नहा-धोकर ,कमर पर बढिया लंगोट कसकर , ऊपर से एक कुरता झाडकर , बैठक में हुमसकर बैठा जायेगा । लोग पछेंगे ,पहलवान ,क्या कर आये ? वे आंखें बन्द करके दूसरों के सवाल सुनएंगे, दूसरों को ही जवाब देने देंगे । देह की ताकत और भंग के घुमाव में सारे संसार की आवाज़ें मच्छरों की भन्नाहट सी जान पडेंगी ।”……जय हो ई भांग महात्म हमको ..सुकुल जी के राग दरबारी में प्राप्त हुआ ..आज के दिन ..गज्जबे है जी गज्जबे है

और इसके बाद तो फ़िर ,जोगीरा सारारारारा ,

 

धार चले रंग , पिचकारी के जोर से , उडे हवा में गुलाल …फ़र्रर्रर्रर्रर्रर्रर्र,
आ झूम झूम गाए जोगीरा , बोल जोगनिया बोल जोगरिया , सर्रर्रर्रर्रर्र

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अमां कहां बेठे हो छुप के मितरा , नहीं चलेगी अबके आंख मिचोली रे ,
नेताओं की तो जो होनी थी हो ली , अब तो आई है ये पब्लिक की होली रे

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अबे हम कहेंगे तो फ़िर नहीं मानोगे तुम , अब होली में वो पहले से रंग नहीं होते ,
नफ़ासत और नज़ाकल से रगडते हैं लोगबाग अब , कित्ता रगड लें , बेढंग नहीं होते

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कऊन जीता ,कऊन हारा , के हीरो के ज़ीरो , अबे छोडो धक्का मुक्की ,
एक ठो भावी युबराज डूब लिए , तो फ़िर जो आई कांग्रेस ,मोहन जी की पिरधानी तो पक्की …

..हो बोलो ..सारारारारा ….युबराज सारारारा….पिरधान जी सारारारारा

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सरकार पिटी और सत्ता भी , का बजता देख ,ज़ोर ज़ोर से ढोल ,
फ़ौरन मंतरी जी किए उपाय ,सुना है ,बढेगा पांच रुपिया पेटरोल

दु कुप्पी इनके पिछवाडे ..पिटरोल ढारारारारा …जोगीरा सारारारारारा

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सपा से नहीं बसपा से करेंगे गठबंधन , बोले हैं बाबा बेनी पिरसाद ,
आयं , तो “भट्टा” बिठाते रहे जब युबराज , तब नय था ई सब याद ..

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ल्यो जी विधानसभा चुनाव का आ गया कम से कम एक ठो परिणाम ,
जीते हारे कोई भी , सरकार बनाए कोई भी , आज से बढे सीएनजी के दाम

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घोटाले पर घोटाले करके , मंतरी जी , बीमार कर दिए देस ,
चेकअप पे चेकअप कराने को , मेड्डम्म जी घूम रहीं बिदेस

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माया के बुत और हाथी सब , अब हो रहे बेपर्दा ,
साफ़ सफ़ाई भी कराइए लो , पडते रहेगा अगिले पांच बरस तक गर्दा ..

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इलेकसन के बहार में , घूमे चढ हेलीकाप्टर ,बनके बाबा लाटसाब ,
भकभका के लग गई मरची , जब कोई पूछ लिया हिसाब …

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भूख , गरीबी , बेकारी और घोटाले से जूझते देश का देखिए हाल ,
लगभग दज़ हज़ार करोड के घाटे की ,पडी कल जो रही हडताल ..
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और अब देखिए तनिक गोलू एंड बुलबुल कंपनी प्राइवेट लिमिटेड की रंगा रंग होली चित्रहार

पापा ........मैंने भी अपनी पिचकारी भरनी है

 

और ये बुलबुल जी अपनी पिचकारी लोड करते हुए

 

बुलबुल विद बुलबुले ..रंगीन बुलबुले

 

पापा ...मोबाइल पीछे करो ..मुझे निशाना लगाना है

 

पापा ..मैं पहले पोज़ मार लेता हूं

 

गोलू जी ..बुलबुल को ..टरेनिंग ऑफ़ भरिंग द रंग इन पिचकारी ..तफ़सील से देते हुए

जौउन लोगों को लगता है कि हम खाली , कंप्यूटर बबा आ राग दरबारी का भर दिन खून पिए रहते हैं , उनके जेनरल नालेज के लिए खासमखास बता दें कि अपन home science में भी इत्ते दक्ष हैं कि ..श्रीमती जी से भी चाब्बासी लूट लें , हां हां आप सबूत के बिना मानिएगा नय न , देखिए हमरे कर कमलो द्वारा तैयार , पिलेट भर मालपुआ …

हमारे करकमलों द्वारा तैयार मालपुए