कोई पूछे तो कह देना , हो रहा भारत निर्माण …..

मातम पसरा है शहर में , और भीड भरा है शमशान ,
कोई पूछे तो कह देना , हो रहा भारत निर्माणचुप्प बैठे पिरधान जी , परदेस जा बसीं मादाम ,
कोई पूछे तो कह देना , हो रहा भारत निर्माणमुलाकात कहां हुई लोकतंत्र से दिखला देना वो मैदान ,
कोई पूछे तो कह देना , ऐसे होगा भारत निर्माणबेइमान पकडने का जिम्मा लेकर , हाकिम खुद हो गए बेइमान ,
कहा जो पूछे कोई तो कह देना , हो रहा भारत निर्माण ….कहीं भूख से , कहीं लूट से , कहीं जा रही यूं ही जान ,
क्या फ़िर भी यही है कहना , हो रहा भारत निर्माण ??सवा अरब का देश चलाए , एक ही वंश की संतान ,
पूरा देश बीन बजाए , हो रहा भारत निर्माण …

Sep 09, 2011 @ 07:03:39
सवा अरब का देश चलाए , एक ही वंश की संतान ,
पूरा देश बीन बजाए , हो रहा भारत निर्माण …
सवा अरब का देश वुनकर लाये….एक ही वंश की संतान ,…..तब तो बस बीन ही बज सकती है और ऐसे ही होता रहेगा भारत का निर्माण…..
जागो भारत प्यारे……जानो अपने अधिकार….उपयोग करो उनका!!!
Sep 09, 2011 @ 10:13:36
हां समीर भाई ,
आपने बिल्कुल सच कहा , और अब भारत को जगाने का ही काम हो रहा है , कार्य प्रगति पर है …
Sep 09, 2011 @ 07:09:27
सटीक अनुपम प्रस्तुति.
अब मादाम परदेश से वापिस आ गईं हैं अजय जी.
आपने क्यूँ भुलाया हुआ है मुझे ?
Sep 09, 2011 @ 10:15:28
शुक्रिया राकेश भाई ,
आपको भुलाने की मैं सोच भी नहीं सकता , धर्म पर लिखा गया आपका एक एक शब्द इस अंतर्जाल पर युगों तक सहेजा रहेगा और ये आने वाली नस्लों के लिए वरदान से कम नहीं होगा , यकीनन
Sep 09, 2011 @ 10:12:09
Edit
भारत निर्माण
by Rajeev Gautam on Friday, September 9, 2011 at 10:09am
रोज होता है बोम्ब धमाका, मासूमो की जाती जान !!
कोई पूछे तो कह देना , हो रहा भारत निर्माण….
मातम पसरा है दिल्ली सहर में , भीड भरा है शमशान !!
हस हस कर साले नेता कहते, हो रहा है भारत निर्माण ….
कांग्रेस की सत्ता है ये , भ्रस्ताचारियो का मैदान !!
कोई पूछे तो कह देना , हो रहा भारत निर्माण…..
बेइमान पकडने का जिम्मा लेकर , हाकिम खुद हो गए बेइमान!!
कहा जो पूछे कोई तो कह देना , हो रहा भारत निर्माण ….
सवा अरब का देश चलाए , एक ही वंश की संतान ,
पूरा देश बीन बजाए , हो रहा भारत निर्माण …..
ऐसे कुछ नहीं होगा भाई , देश की जनता जागो !!
देश के नेता भ्रष्ट हो गए, ऐसे घंटा होगा भारत निर्माण …..
Sep 10, 2011 @ 12:26:01
कहीं भूख से , कहीं लूट से , कहीं जा रही यूं ही जान ,
क्या फ़िर भी यही है कहना , हो रहा भारत निर्माण ??
सटीक चित्रण , भारत निर्माण सिर्फ कागजों में है
Sep 10, 2011 @ 15:00:56
कहीं भूख से , कहीं लूट से , कहीं जा रही यूं ही जान ,
क्या फ़िर भी यही है कहना , हो रहा भारत निर्माण ??
सटीक चित्रण , भारत निर्माण सिर्फ कागजों में है
Sep 10, 2011 @ 21:04:18
बहुत ही सार्थक यथार्थ पर अच्छा ब्यंग करती हुई बहुत शानदार रचना /बहुत बधाई आपको /
कृपया मेरे ब्लॉग पर आइये और अपने विचार से मुझे अवगत करिए /धन्यवाद /
Sep 10, 2011 @ 21:10:34
बहुत ही सार्थक और यथार्थ पर अच्छा ब्यंग करती हुई शानदार रचना /बधाई आपको /
मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है .आप आयें और अपने विचार से मुझे अवगत करें /धन्यवाद /
Sep 11, 2011 @ 10:25:21
आपकी पोस्ट की हलचल आज यहाँ भी है