ब्लॉगिंग को ललकारिए मत , ब्लॉगिंग ललकारेगी तो आप चित्कार कर उठेंगे

मुट्ठी बंद हो गई तो ...???

ब्लॉगिंग को विशेषकर हिंदी ब्लॉगिंग को पांव पसारे अभी ज्यादा समय बीता भी नहीं है कि उसे निशाने पर लिया जाने लगा है । कभी साहित्यकार उसे अपनी कुंठा और शायद एक भविष्य के प्रतिद्वंदी के रूप में भांप कर अपनी भडास रूपी विचार उगल रहे हैं तो कभी कोई संपादक हिंदी ब्लॉगिंग का विश्लेषण करने बैठ जाता है । कभी मीडिया इसे न्यू मीडिया के नाम पर इसके चीरफ़ाड में लग जाता है तो कभी अन्य भाषाओं की ब्लॉगिंग से हिंदी ब्लॉगिंग की जबरिया तुलना करके उसे स्तरहीन और दिशाहीन करार दिए जाने का प्रयास हो रहा है । सबसे ज्यादा सोचने की बात ये है कि ये हाल तब है जब पिछले पांच वर्षों में हिंदी ब्लॉगिंग बलिश्त भर ही बढ पाई है और आज भी एक सशक्त संकलक , एक सशक्त प्लेटफ़ॉर्म और गैर ब्लॉगर पाठकों को खींच लाने जैसे मुद्दों पर भी विमर्श नहीं कर पाई है । हालिया कुछ वर्षों में तो उठापटक और हलचल इतनी ज्यादा बढ गई है कि कई बार संकलकों का अचानक बंद हो जाना तो कई बार ब्लॉगर जैसे प्लेटफ़ॉर्म द्वारा कई ब्लॉग्स को ही मिटा या बंद कर देने जैसी अप्रत्याशित घटनाओं के बीच भी यदि ब्लॉगिंग की धमक बढती जा रही है तो फ़िर आप उसे सिरे से नकार के क्या और कितना साबित कर पाएंगे , ये समझ से परे है ।

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यदि हिंदी ब्लॉगिंग के परिप्रेक्ष्य में बात की जाए तो हिंदी ब्लॉगिंग की दिशा पर चिंतन करने वाले गैर ब्लॉगर्स को ,( यहां गैर ब्लॉगर्स इसलिए कहा है क्योंकि ब्लॉगर जब खुद हिंदी ब्लॉगिंग पर कुछ कहता लिखता है तो वो उनका ब्लॉगरीय अनुभव ही होता है और आने वाले समय में यही अच्छा बुरा अनुभव आने वाले सभी ब्लॉगर्स के लिए एक मार्गनिर्देशिका की तरह साबित होगा ) कुछ बातें तो नि: संदेह ही ध्ज्यान में रखनी होंगी । आज भी हिंदी ब्लॉगिंग दिनोंदिन प्रचुर सामग्री और निरंतर बढ रही पोस्टों , ब्लॉग्स की संख्या के बावजूद अब तक उसका आर्थिक पक्ष सामने नहीं आया है । इसके पीछे भी ये तर्क दिया जाता है कि हिंदी ब्लॉगिंग में ऐसा काम ही नहीं किया जा रहा है कि उसे दुनिया भर के पाठक और पैसा मिले । हिंदी ब्लॉगजगत में लिखी पढी जा रही नियमित पोस्टों से , विभिन्न विषयों पर हो रहे शोध और जानकारियों वाले ब्लॉगों की बहुलता को नजदीक से देखने वाला कोई भी आसानी से समझ सकता है कि ये सरासर ही गलत है । आज बात तीसरा खंबा की हो या अदालत की , बात साईंस ब्लॉगर्स एसोसिएशन की हो या शब्दों का सफ़र की , हिन्दी युग्म हो साहित्यशिल्पी , और जाने कितने ही ब्लॉग और ब्लॉगर्स अपना सब कुछ उडेलने को उद्दत हैं । एक बडा सवाल ये है कि , आखिर क्यों हिंदी ब्लॉगिंग से ये कमाल की अपेक्षा की जा रही है कि हिंदी ब्लॉगिंग में जो भी लिखा पढा जाए वो नैतिकता , साहित्य , भाषा , मौलिकता , सभी के पैमाने पर बिल्कुल खरा उतरे ? क्यों भाई ?

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क्या मीडिया में पैसे देकर खबर दिखाने , दबाने वाले आपने आज तक नहीं देखे सुने या कि आप उन्हें देखना ही नहीं चाहते ? साहित्य पुरुस्कारों में किस तरह की धांधलेबाजी और साहित्य की छीछालेदारी पिछले कुछ वर्षों में आम पाठक को दिख रही है यदि वो सब आपको नहीं दिखाई दे रही है तो फ़िर स्पष्ट बात है कि दूसरे की फ़ुंसी की चिंता में आपको अपना फ़ोडा नहीं दिखाई दे रहा है ? और साहित्य क्या सारा का सारा अनुपम और मौलिक ही है । उस साहित्य को क्या कहेंगे आप जो किसी भी शहर की सडकों की पटरियों के किनारे काली पन्नियों में दबा छुपा के पढा और पढाया जा रहा है ? आपका साहित्य कहां उस साहित्य को रोक पाया है न ही उसे दबा पाया है , कम से हिंदी अंतर्जाल में इतना तो है ही कि पोस्टों को पढने लिखने के लिए उपलब्ध करा रहे संकलक रुपी प्लेटफ़ार्म पर अब भी उस सामग्री की पहुंच को दूर ही रोके रखने में सफ़ल रहा जा सका है जिसे अभद्र और अश्लील सामग्री कहा जाता है । ब्लॉगिंग हिंदी ब्लॉगिंग में जो भी कच्चा माल उतर रहा है जरा उसे पकने तो दीजीए । आज एक आम शिक्षक , एक आम कर्मचारी , एक आम डाक्टर , एक आम इंजिनियर की किसी पोस्ट को आप आम और शायद फ़ालतू इसलिए ठहरा पा रहे हैं क्योंकि उसने अभी उस अंतर्जालीय डायरी को विस्फ़ोटक शैली में लिखना नहीं शुरू किया है ।

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कल की कल्पना की जाए तो स्पष्ट दिखता है कि आने वाले समय में जब हिंदी ब्लॉगर के कार्य को देखने समझने के लिए न सिर्फ़ मीडिया , प्रशासन , और साहित्यकारों को बाकायदा अनुमति लेनी होगी और शायद कुछ शुल्क भी अदा करना पड जाए । तब वो पोस्ट जो किसी समाचार पत्र के किसी पन्ने पर छपी हुई खबर के रूप में , कोई पोस्ट , सरकारी योजना और उससे जुडे भ्रष्टाचार की कलई खोलती एक्सक्लुसिव समाचार के रूप में सामने आएगी । आज सिनेमा देख कर एक दर्शक के रूप में , किसी घटना को देखकर एक नागरिक पत्रकार के रूप में , किसी जानकारी खोज को साझा करती हुई कोई पोस्ट जब लोगों के सामने आएगी तो स्वाभाविक रूप से वो आम आदमी उस दुनिया में झांकने की कोशिश तो जरूर ही करेगा जहां से ऐसी खबरें और पोस्टें निकल के आ रही हैं । यहां ये दलील देने वालों ,  कि अंतर्जाल की पहुंच आज भी बहुत सीमित है , को बताना समीचीन होगा कि आज मोबाईल में ही लोग आसानी से न सिर्फ़ हिंदी अंतर्जाल की पोस्टों को पढ रहे हैं बल्कि उस पर प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं । आने वाला समय निश्चित रूप से बहुत सी बातों को तय करेगा और उसमें से एक यही होगा कि जो भी गहरा होगा , दमदार होगा , सटीक और स्पष्ट होगा वो सारे कचरे , सारी छिछली सामग्री को उसी तरह पीछे धकेल देगा जैसे कि किसी साधारण सी कहानी के कथानक पर बना कोई सिनेमा कभी कभी लीक पर चल रहे सिनेमा लिटरेचर को झुठलाते हुए आम दर्शकों से सर चढ के बोलता है ।

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“”इसलिए हिंदी ब्लॉगिंग के प्रति पूर्वाग्रह रख कर उसका विश्लेषण करने वालों तो ये स्पष्ट संदेश दिया जाना चाहिए कि , बेशक आप हिंदी ब्लॉगिंग की बढती ताकत , उसके निरंतर विशाल होते कद को झुठला कर आंखें मूंदे बैठे रहें , लेकिन यदि आपने हिंदी ब्लॉगिंग को ललकारा तो फ़िर जो बहस और विमर्श शुरू होगा और ऐसी ही कोई कोशिश प्रतिक्रिया में हिंदी ब्लॉगर्स द्वारा भी शुरू कर दिया गया तो आप चित्कार उठेंगे । गनीमत सिर्फ़ ये है कि अभी मीडिया , प्रशासन , लेखक पाठक वर्ग , छात्र युवा वर्ग , पेशेवर बुद्धिजीवी वर्ग  ब्लॉगिंग में नहीं आ पाया है , हालांकि इसके लिए भी कमर कस ली गई है और आने वाले समय में स्कूल कॉलेज , विभिन्न संस्थानों , मीडिया ग्रुपों , अखबारनवीसों , सरकारी कर्मचारियों , को भी कार्यशालाओं के माध्यम से इस धारा में लाने की योजना को कार्यरूप दिया जा रहा है । “”

32 Responses to ब्लॉगिंग को ललकारिए मत , ब्लॉगिंग ललकारेगी तो आप चित्कार कर उठेंगे

  1. Shivam Misra says:

    अजय मेरे पास शब्द नहीं है यहाँ अपनी राय देने के लिए … मेरे मन की बात तो जैसे की आपने भांप ली हो और उतर दिया है उसको यहाँ अपने शब्दों की शक्ल में ! जय हो ! जैसे कंस को अपने अंत की खबर लगी थी और वह अबोध बालको का वध करने लगा था … ठीक वैसे ही लगता है … हिंदी ब्लोगिंग के कुछ मामाओ को खबर मिल चुकी है कि अब उनका अंत आ गया है … तभी पंगा ले रहे है ! पर सब जानते है … सत्यमेव जयते … सदा सदा जयते !!

  2. बहुत सही!!

    वैसे सच कहें तो आज ही कुछ लम्बा चौड़ा लिखा था मगर ये आलेख देख उसे आत्मसमर्पित भाव से वापस लेकर प्रसन्न मुद्रा में बैठे हैं. :)

    मान गये ये तेवर भी, बधाई!!!

  3. प्रवीण पाण्डेय says:

    ब्लॉग की हलचल को हल्के में नहीं लिया जा सकता है।

  4. ब्‍लॉग की अपनी अलग खासियतें हैं, लेकिन उसे इस तरह अलग काट कर देखना किसी दृष्टि से उचित नहीं जान पड़ता. वैसे आपके उठाए मुद्दे और उनका व्‍यवस्थित विश्‍लेषण सटीक है.

  5. अच्छा आलेख है, समीर लाल जी ने इस आलेख को पढ़ कर अपना वापस ले लिया। उसे भी प्रकाशित होना चाहिए।

    • आपके आदेश जैसे किसी भी आदेश की प्रतिक्षा मात्र थी..मैं टाल कैसे सकता हूँ. जो वापस लिया गया, वह तो विस्तार से आयेगा ही..मगर उसे वापस लेने और जय भाई के इस ललकारी आलेख को पढ़ते एक और आलेख उचक आया….पहले आदेश करें तो उसे प्रस्तुत कर दिया जाये …हालांकि वो भी उस वापस लिए आलेख का हिस्सा मात्र है.

      लिख इसलिए दिया कि सनद रहे और वक्त पर काम आये वरना बाद में लांछन लगे कि जोड़ तोड़ कर आलेख बना लिया आलेखकार कहलाने के मोह वश….

      बस, दर्ज कर लिजिये जो आ रहा है वो अगले का हिस्सा ही है. :)

      • यलगार हो ……..कनेडा से कटिहार तक , और मॉंट्रियल से मोकामा तक ..। लाईए हो महाराज जल्दी से

      • sanjay jha says:

        अच्छा किया आपने जो कह दिया……

        दिल टूटने से थोड़ी सी तकलीफ तो हुई
        लेकिन तमाम उम्र का आराम मिल गया !

        बालक ने कुछ समझने की कोशिश भर की है”………..

        प्रणाम.

  6. Saleem Khan says:

    मज़ा आ गया पढ़कर !

  7. सलीम खान जी आया मज़ा यहीं बरकरार रहना चाहिए
    जाना नहीं चाहिए
    हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग का घूंसा एक दिन घूस का साम्राज्‍य भी हिला देगा
    सिर्फ जारी दशक ही काफी है
    फिर भ्रष्‍टाचारियों को चाय भी नसीब नहीं होगी

  8. @ समीर लाल
    समीर जी,
    इसी का नाम तो ब्लागीरी है, बात जब निकल आए तो कहनी चाहिए। रुक गई तो ब्लगीरी क्या हुई? फिर एक संगोष्टी में तीन पर्चे पढ़े जाएँ और उन में यदि आधा भाग भी कॉमन हो तो भी पढ़े तो जाते ही हैं। उन का भी महत्व है।

  9. ले ही आये आखिर:

    साहित्य और अन्तर्जाल…परिवर्तन की बयार- भाग १

    http://udantashtari.blogspot.com/2011/02/blog-post_24.html

  10. shekhar says:

    लीजिये कटिहार वाले भी पहुँच गए हैं….
    सावधान हो जाएँ वो लोग जो हमें ऐरा-गैरा समझने की भूल कर रहे हैं…
    ये हिंदी का हथौड़ा जब किसी पे पड़ता है न तो वो उठता नहीं उठ जाता है…:)

  11. अन्तर सोहिल says:

    जय हो!
    ब्लॉगिंग के दुश्मनों के लिये ऐसे ही आस्तीनें चढाये रहिये जी :)
    जो अपना घर नहीं चला सकते वो देश चलाते हैं।
    अनपढ आज अफसर बन बैठे हैं।
    बिना सोचे समझे बोलने वाले भी संपादक, साहित्यकार बन जाते हैं।

    प्रणाम

  12. vandana gupta says:

    ये हुयी ना बात्…………अजय जी आज जाकर बलिष्ठ प्रहार किया है…………हम मे दम है तो मुकाम हासिल करके रहेंगे…………यूँ ही थोडे ही हमने ब्लोगिंग का गुणगान किया था………
    “वन्दे ब्लोगिस्तान…………”
    आओ ब्लोगरों तुम्हें दिखाएं झांकी ब्लोगिस्तान की
    इस ब्लोगिंग को नमन करो ये ब्लोगिंग है कमाल की
    वन्दे ब्लोगिस्तान , वन्दे ब्लोगिस्तान

    बड़े बड़े दिग्गज यहाँ पर मुँह की खाके जाते हैं
    ऐरे- गिरे नत्थू खैरों के भी दांव चल जाते हैं
    हिंदी इंग्लिश भाषा -भाषी यहाँ मिलते हैं बड़े प्यार से
    जिनकी रग -रग में बहती हैं धाराएं ब्लॉगिंग नाम की
    इक धारा में बहते सारे , बनते मोती ब्लोगिस्तान के
    इस ब्लोगिंग को नमन करो ……………….

    छोटी मोटी बाधाएं ना ब्लोगरों को हिलाती हैं यहाँ लिखी रचनायें भी मील का पत्थर बन जाती हैं
    समीक्षाएं भी हो जाती हैं कालजयी भी बन जाती हैं
    साहित्य की हर विधा यहाँ पर जानी जाती है
    नमन करो उस ब्लागस्पाट को जो ब्लोगिंग से जुड्वाता है
    अन्दर बैठे कलाकार को बाहर लेकर आता है
    वन्दे ब्लोगिस्तान वन्दे ब्लोगिस्तान

    टिप्पणियां नाच नचाती हैं कभी अग्रीगेटर नाच नाचते हैं
    मगर हम ब्लोगर हर बाधा को धता बताते हैं
    ब्लोगिंग की बहती धारा अपना इतिहास बनाएगी
    आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ सन्देश पहुंचाएगी
    सलाम करो उस जज्बे को जो ब्लोगर मीट कराती है
    विश्व पटल पर हिंदी ब्लोगिंग अपना परचम फहराती है
    इस ब्लोगिंग को नमन करो ………………………….

    तो फिर अब तो मानना ही पडेगा ना सबको इसकी अहमियत को………आप तो बस लगे रहो ………हम सब आपके साथ हैं।

  13. sanjay jha says:

    बुलेट है बुलेट ….. अरे रे रे रे ….. चढ़ने वाला नहीं ……दागने वाला ………

    यलगार हो ……. ठायं…ठाय……

    प्रणाम.

  14. सत्यमेव जयते … सदा सदा जयते

  15. Shah Nawaz says:

    बिलकुल सही कहा अजय भाई!!!

  16. ये हुई न बात अजय जी !
    क्या जोर का झटका जोर से मारा है

  17. anjule says:

    बिलकुल ब्लोगिंग को ललकारने वाले ndTv का मेनेजमेंट याद होगा …बड़े रौब से हडकाया था साहबों ने ब्लागरों को ..लेकिन ऐ ब्लागरों की ही आवाज थी जो बरखा को कटघरे में उतार खड़ा किया…. डर असल ये जो ब्लोगिंग पे चिल्ला रहे हैं ये उसका डर है खुद की जगह छिनने का …लेकिन डर से तो बदलाव रुकता नहीं है ना..

  18. आगाज तो आपने कर ही दिया है अब अंजाम तो बेहतरीन होना ही है. शुभकामनाएं.

    रामराम.

  19. Sushil Bakliwal says:

    मुकाबला हमसे ना करो, मुकाबला…
    हम तुम्हें अपने रंग में रंग डालेंगे एक ही पल में.

    अजयजी संघर्ष करो सब तुम्हारे साथ हैं.

  20. बढ़िया विश्लेषण किया है ब्लोगिंग डायरी का ! नया कलेवर पसंद आया है ! हार्दिक शुभकामनायें अजय !

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